हमने स्वीकार कर लिया, तुम्हें स्वीकार नही।
और पागल इतनी है कि फिर से यकीन कर लेते हैं…!
काश वो मेरा कुछ न होता पर मुक़द्दर होता।
शिकायत हमसे है, या किसी और से मुलाकात हो गई…!
यु न खिल खिल के हँसा कर उदास लोगो पे ऐ दोस्त,
मोहब्बत में हार कर भी तुझे याद करता हूँ,
मोहल्ले की मोहब्बत का भी अजीब फसाना है,
तुमसे बिछड़कर अब किसी से मोहब्बत नहीं होती,
ये न सही Sad Shayari in Hindi करने देती है न ही कुछ गलत करने देती है।
आज जो तुम्हारा है… कल किसी और का इंतज़ार हो सकता है।
एक दर्द-ए-दिल है, वो भी किसी का दिया हुआ।
किसी के पास यकीन का कोई इक्का हो तो बताना,
इन ज़ख़्मों से, इन सवालों से बहुत दूर हो जाऊँ…
तेरे बिना ये ज़िंदगी— अपने जैसी भी नहीं लगती अब।